चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने वालों को हो सकती है दो साल की सजा

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मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिखा लंबित चुनाव सुधार प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा मैंने इन प्रस्तावों में तेजी लाने के लिए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को लिखा है और उम्मीद है कि मंत्रालय इन पर जल्द विचार करेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह पत्र पिछले महीने पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने वालों के लिए कारावास की अवधि मौजूदा छह महीने से बढ़ाकर दो साल करने का प्रमुख चुनाव सुधार प्रस्ताव रखा है। इसके साथ दो साल की जेल की सजा वाले उम्मीदवार को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से रोक लगाए जाने की मांग की गई है।

कानून मंत्री को लिखे पत्र में सुशील चंद्रा ने चुनाव प्रचार के अंतिम और मतदान वाले दिन समाचार पत्रों में राजनीतिक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव किया है ताकि मतदाता प्रभावित न हों और स्वतंत्र दिमाग से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

अभी तक, केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मतदान के खत्म होने से 48 घंटे पहले चुनावी प्रचार सामग्री दिखाने से रोक दिया गया है। लेकिन समिति ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के दायरे में अब प्रिंट मीडिया को भी लाने की सिफारिश की है।

इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि सुधारों में एक और प्रस्ताव मतदाता सूची को आधार से जोड़ने का है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर मतदाता का एक से अधिक स्थान पर मतदाता सूचियों में नाम होने पर रोक लगाई जा सकेगी। चंद्रा ने कहा कि इसको लेकर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा था कि चुनाव आयोग का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और इसके लिए चुनावी कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी।

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