राममंदिर ट्रस्ट को घेरने की कोशिशों को झटका, यहां से शुरू हुई थी गड़बड़ी

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वक्फ डीड के आधार पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को घेरने की तैयारी कर रहे लोगों को झटका लगा है। रजिस्ट्री के एक माह बाद हरीश पाठक और कुसुम पाठक के पक्ष में हुए नामांतरण में सभी आरोप खारिज कर दिए गए।

वक्फ डीड के परीक्षण का हवाला देते हुए तहसीलदार ने लिखा है कि जिन पुराने नंबरों से नए नंबर का दावा किया जा रहा है, वह गलत है। वक्फ की जमीन के पुराने गाटा संख्या 271, 272, 273, 274, 275,276 व 277 का कोई भी क्षेत्रफल नई गाटा संख्याओं 242, 243,244, 246 में शामिल नहीं है। बल्कि इसका गाटा संख्या 256, 257,258, 259. 260 और 262 है। 13 मई 1924 को फकीर मोहम्मद पुत्र निरह व उनकी पत्नी बख्तावर बीबी निवासी बरवारी टोला अयोध्या की कोई औलाद नहीं होने से अपनी समस्त भूमि अल्लाहताला के नाम वक्फ को देने का आवेदन किया। तब पूरी मिल्कियत की मालियत 12 हजार थी, जो दफा-30 के तहत 20 मई 1924 को रजिस्टर्ड हो गया। 

इसके साथ संपत्ति को बेचना, खरीदना, गिरवी रखना अवैध हो गया। रजिस्टर्ड वक्फनामा में भूमि बंदोबस्त के पहले के नंबर गाटा संख्या 271, 272, 275, 276, 274, 273 व 277 से मौजा बाग बिजैसी दर्ज था, इसे लेकर दावे किए गए कि भूमि बंदोबस्त के बाद बदलकर उक्त गाटा संख्या 242/1, 242/2, 243, 244 246 हो गया। 

वक्फ कर्ता बख्तावर बीबी व फकीर मोहम्मद के नाम फसली 1344 में खाता संख्या 3 में अंकित गाटे 242, 243, 244 व 240 मौजा बाग बिजेसी अंकित है। खतौनी उर्दू में है। इससे बने नए गाटे पूरी तरह स्पष्ट हैं। गाटा संख्या 274 व 276 से नया गाटा 242 बना है।

जबकि गाटा संख्या 272 से गाटा संख्या 243 और गाटा संख्या 273 व 275 से नया गाटा संख्या 244 बना है। जबकि गाटा संख्या 277 व 270 से नया गाटा संख्या 246 बना है। बोर्ड में पंजीकृत दस्तावेज में व्यवस्था दी गई है कि खानदान का एक सदस्य इसका मुतवल्ली होता रहेगा। जबकि कुछ लोग सदस्य चुने जाएंगे।

वक्फ की प्रॉपर्टी समाज के लिए प्रयोग की जाएगी व्यक्तिगत नहीं। मुतवल्ली के नाम प्रॉपर्टी की वरासत दर्ज होती रहेगी। पहली कमेटी हिंदू-मुस्लिम एकता की परिचायक थी, इसमें सैयद अब्दल, बाबू केशव प्रसाद और जगन्नाथ सिंह शामिल थे।

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