DRDO की कोरोनारोधी दवा 2-डीजी, हर स्‍ट्रेन पर है कारगर

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DRDO की कोरोनारोधी दवा 2डीजी कोरोना के हर स्ट्रेन से लड़ने में सक्षम है। इस दवा का मैकेनिज्म वायरस के प्रोटीन के बजाय मानव कोशिकाओं के ही प्रोटीन में बदलाव कर देता है जिससे वायरस कोशिका के अंदर पनाह ही नहीं ले पाता है।

डीआरडीओ के अधिकारियों ने दी है। कोरोना मरीजों के इलाज के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की दवा 2 डीआक्सी-डी ग्लूकोज (2-डीजी) की 10 हजार डोज का पहला बैच अगले हफ्ते की शुरुआत में लॉन्‍च किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में दवा के इस्तेमाल के लिए उत्पादन में तेजी लाने का काम किया जा रहा है। ये दवा डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की एक टीम ने बनाई है।

ऐसा माना जा रहा है कि दवा 2-डीजी कोरोना के इलाज में गेम चेंजर साबित हो सकती है। कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए यह दवा किसी संजीवनी से कम नहीं है। 2डीजी के साइड इफेक्ट के बारे में डॉक्‍टर्स बताते हैं कि सामान्य कोशिकाओं का मेटाबालिज्म (भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया) संक्रमित कोशिकाओं से बिल्कुल अलग होती है। दवा की मात्रा सामान्य कोशिकाओं तक कम ही जाती है और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2डीजी कोरोना के हर स्ट्रेन से लड़ने में सक्षम है। इस दवा का मैकेनिज्म वायरस के प्रोटीन के बजाय, मानव कोशिकाओं के ही प्रोटीन में बदलाव कर देता है, जिससे वायरस कोशिका के अंदर पनाह ही नहीं ले पाता है। वहीं बाकी की एंटी वायरल दवाएं वायरस के ही प्रोटीन पर ही वार करतीं हैं और जब वायरस में म्युटेशन हो जाता है तो दवाइयां काफी हद तक निष्प्रभावी हो जाती हैं। इससे वायरस किसी भी स्ट्रेन का हो वह बेकार है। हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैब द्वारा 2डीजी पर चलाए गए क्लीनिकल ट्रायल के प्रमुख वैज्ञानिक रहे आइएनएमएस के डॉ. अनंत नारायण भट्ट और डॉ. सुधीर चांदना ने देखा है कि तीसरे चरण के ट्रायल में यह दवा कई वैरिएंट्स पर प्रभावी है।

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