बाराबंकी मस्जिद ध्वस्तीकरण: अवैध कब्जे को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के खिलाफ FIR

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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में रामसनेही घाट में 100 साल पुरानी मस्जिद (100 Yaer Old Mosque Demolition) मामले में 7 लोगों के खिलाफ दर्ज केस कराया गया है. 17 मई को तहसील परिसर में बने अवैध भवन गिराने के बाद मामला गरमा गया और सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फ़ारूक़ी ने धार्मिक स्थल बता कर हाई कार्ट जाने की चुनौती दी थी तो वहीं एसपी और कांग्रेस ने अपनी सियासी रोटी सेंकने के लिए मस्जिद बता कर विरोध शुरू कर दिया।

तहसील परिसर में अवैध कब्जे को लेकर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने केस दर्ज कराया है. सातों पर कमेटी बनाकर अवैध रूप से तहसील प्रांगण में आवास की जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कराने का आरोप है. तहसीलदार रामसनेहीघाट की जांच में तत्कालीन निरीक्षक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ और दूसरों की मिलीभगत सामने आई है. अवैध रूप से इकाई बनाने और आपराधिक कृत्य करने का आरोप लगाकर सातों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया.

डीएम डॉ. आदर्श सिंह का कहना है कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था. नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया. डीएम ने कहा कि माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है. इसी आधार पर उपजिला मजिस्ट्रेट रामसनेहीघाट न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित आदेश का अनुपालन 17 मई 2021 को कराया गया है.

इनको किया गया नामजद
मामले में नया मोड़ तब सामने आया, जब जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुमार ने रामसनेहीघाट कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इसमें मुश्ताक अली, वकील अहमद, मो. अनीस, मो. मुस्तकीम खानिज, दस्तगीर, अफ़ज़ाल, मो. नसीम निवासी धरौली और तत्कालीन निरीक्षक सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड लखनऊ मो. ताहा को नामजद किया गया है।

फर्जी तरीके से किया गया था कब्जा
सोन कुमार का कहना है कि तत्कालीन सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड निरीक्षक मो. ताहा की मिलीभगत से अवैध रूप से पंजीकरण कराकर 5 जनवरी 2019 को वक़्फ़ की संपत्ति घोषित करा ली थी, इसलिए सभी नामजदों ने मो. ताहा से मिलीभगत कर फर्जी अभिलेख बनाए थे। ये जमीन सरकारी है और निर्माण पूरी तरह अवैध था। सोन कुमार वक्फ बोर्ड के सहायक सर्वे आयुक्त भी हैं। इनका कहना है कि निरीक्षक मो. ताहा की जांच में मिलीभगत उजागर हुई है। ये धोखाधड़ी कमिटी बनाकर की गई।

सियासत तेज

बता दें कि इस मामले सियासत भी गर्म है. समाजवादी पार्टी ने मस्जिद को तोड़े जाने की घटना की निंदा की है. सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक प्रतिनिधिमंडल भी बनाया है, जो गुरुवार को बाराबंकी के जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह से मिला और इस घटना के बारे में बातचीत कर उन्हें राज्यपाल के नाम का ज्ञापन सौंपा. सपा के इस दल में पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप, पूर्व सांसद राम सागर रावत, पूर्व कैबिनेट मंत्री फरीद महफूज किदवई, पूर्व कैबिनेट मंत्री राकेश वर्मा, सपा विधायक सुरेश यादव, सपा एमएलसी राजेश यादव राजू के साथ सपा विधायक गौरव रावत शामिल थे.
जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने बाराबंकी के रामसनेही घाट में 100 साल पुरानी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने की घटना को निंदनीय बताया. इस दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप ने कहा कि शासन-प्रशासन का यह कृत्य भारतीय संविधान के सामाजिक सद्भाव की अवधारणा के खिलाफ है. प्रदेश में चुनाव पास आता देख बीजेपी सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने में सक्रिय हो गई है. जनता को इससे सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश की गंगा-जमुनी संस्कृति बिगाड़ कर बीजेपी अपनी राजनीति करती रही है. गोप ने इस घटना की जांच उच्च न्यायालय के जज से कराने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है

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