अमेरिकी विश्वविद्यालय:कोवाक्सिन, स्पुतनिक वी लेने वाले भारतीय छात्र फिर से टीका लें

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अमेरिकी विश्वविद्यालयों की कोरोना टीकाकरण नीति ने भारत समेत विदेशी छात्रों को परेशानी मे डाल दिया है। भारत में कोवाक्सिन या स्पूतनिक वी टीका लगवा चुके भारतीय छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने फिर से टीका लगावाने के लिए कहा है। ऐसे छात्र जिन्होंने कोविड-19 के खिलाफ वैसे टीके लगाए गए हैं जिन्हें अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मंजूरी नहीं मिली है। इसमें भारतीय छात्र भी शामिल हैं जिन्होंने भारत बायोटेक का कोवाक्सिन या रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी लगवाया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय ने उसे कॉलेज परिसर में आने पर फिर से टीकाकरण कराने के लिए कहा है। अमेरिकी विश्वविद्यालय इन टीकों की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर डाटा की कमी को इसका कारण बता रहे हैं। संबंधित छात्रों को सेमेस्टर के शुरू होने से पहले पुन: टीकाकरण करने के लिए कहा जा रहा है। विश्वविद्यालयों के इस आदेश के बाद ये छात्र दो अलग-अलग टीके लेने से सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

छात्रों के सामने आ रही इस तरह की चिंता पर, अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के प्रवक्ता क्रिस्टन नोर्डलंड ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ‘चूंकि कोविड-19 टीके विनिमेय (इंटरचेंजेबल) नहीं हैं, इसलिए दो अलग-अलग टीकों को लेने से सुरक्षा और प्रभावशीलता का अध्ययन नहीं किया गया है।

बता दें कि डब्ल्यूएचओ द्वारा अब तक स्वीकृत कुछ टीकों में अमेरिका की दवा कंपनियों फाइजर इंक, मॉडर्ना इंक और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा उत्पादित टीके शामिल हैं।

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