पीएमएवाई-यू की महिला लाभार्थियों को सम्मानित किया गया

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नयी दिल्ली, 09 फरवरी: आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) और विभिन्न स्तरों पर इस योजना से जुड़ी अन्य महिला लाभार्थियों के सराहनीय प्रयासों को सम्मानित और प्रोत्साहन देने के लिए एक वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन कल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2021 के अवसर पर किया गया था। इस अवसर पर आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप एस. पुरी ने कहा कि ‘गृहस्वामिनी’ के मूल भारतीय दर्शन में निहित भावना दर्शाती है कि महिला से ही घर बनता है। एक घर का स्वामित्व न केवल महिला को सशक्त बनाता है, बल्कि इस घर को उसके परिवार के लिए भी एक बेहतर स्थल बनाता है। उन्होंने कहा कि संपत्ति के साथ एक घर के रूप में न सिर्फ एक महिला में सुरक्षा की भावना में वृद्धि होती है अपितु यह उसे घर से जुड़े निर्णय लेने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने से साथ-साथ वित्तीय सुरक्षा की भावना भी प्रदान करता है।

मंत्री महोदय ने कहा कि मंत्रालय 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ प्रदान करने के माननीय प्रधानमंत्री के स्वप्न को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बेहतर आवास तक पहुंच न सिर्फ महिलाओं, उनके बच्चों और पूरे परिवार बल्कि उनके जीवन पर भी गतिशील रूप से प्रभाव डालता है।

योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाता है। पीएमएवाई (यू) के तहत निर्मित या अधिग्रहित घरों को महिला सदस्य के नाम पर या संयुक्त नाम के मामले में पहले महिला के नाम के साथ प्रदान किया जाता है। पीएमएवाई (यू) के तहत हर घर में शौचालय बिजली और पानी के कनेक्शन जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं तक पहुंच के साथ-साथ यह सुरक्षा और जीवन की गरिमा को भी सुनिश्चित करता है।

कार्यक्रम के दौरान आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने पीएमएवाई (यू) के तहत एक घर पाने के बाद महिला लाभार्थियों की जीवन यात्रा और इससे मिलने वाले आराम के साथ-साथ उनके जीवन में हुए परिवर्तन के विषय में जानकारी के लिए उनसे वार्तालाप किया। लाभार्थियों के घर का भी ऑनलाइन स्ट्रीम के माध्यम से वर्चुअल दौरा किया गया।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने ‘मातृ शक्ति’ को बधाई दी और इस तथ्य का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार पीएमएवाई (यू) के अंतर्गत घर मिलने के बाद महिलाएं कितना सशक्त महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने घर के स्वामित्व के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए इस योजना की अवधारणा की थी। सचिव महोदय ने कहा कि हम सौभाग्यशाली महसूस करते हैं कि लाखों लोगों को उनके सपनों का घर प्रदान किया जा रहा है।

मिश्रा ने ‘पीएमएवाई (यू) के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण’ शीर्षक से एक संकलन भी जारी किया। इस संकलन में पीएमएवाई (यू) की महिला लाभार्थियों की प्रेरक कहानियां जुड़ी हैं। 1 जनवरी 2021 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा जीएचटीसी-इंडिया के अंतर्गत लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स (एलएचपी) के शुभारंभ के दौरान इन लाभार्थियों को सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि ये जीवन बदलने वाली कहानियां महिलाओं को प्रेरणा प्रदान करेंगी।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय सचिव द्वारा ‘पीएमएवाई (यू) पुरस्कार 2021- सौ दिन की चुनौती’ का भी शुभारंभ किया गया। यह अभियान निश्चित अवधि के भीतर घरों को तेजी से निर्मित करने और उनका वितरण के लिए राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा। इस चुनौती के महत्व को बताते हुए, सचिव महोदय ने सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों/यूएलबी और अन्य हितधारकों से इन घरों के निर्माण के शीघ्र कार्यान्वयन के माध्यम से पूरा करते हुए लाभार्थियों को वितरित किए जाने को सुनिश्चित करने की अपील की।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय सचिव ने कहा कि वर्ष 2021 मिशन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इससे जुड़े लोगों को लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर कार्य करते रहना चाहिए।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय में सभी के लिए आवास के संयुक्त सचिव और प्रबंध निदेशमृत अभिजात ने ‘पीएमएवाई (यू) पुरस्कार 2021- सौ दिन की चुनौती’ के विवरण और मानदंडों के बारे में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को पीएमएवाई (यू) योजना के तहत वांछित परिणाम देने के लिए, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को मिशन की जरूरतों के मुताबिक कार्य करना चाहिए और 100 प्रतिशत परिणाम देने चाहिए।

कार्यक्रम के समापन में, यूएलबी ने पीएमएवाई (यू) के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक समूह चर्चा की, जिसमें लाभार्थियों ने अपने घरों और अपनी सशक्तिकरण की कहानियों को साझा करते हुए चर्चा की।

पीएमएवाई (यू) कार्यान्वयन के अपने छठे वर्ष में है। अब तक, 112 लाख घरों की अनुमानित मांग के अनुरूप मंत्रालय ने 111 लाख घरों को मंजूरी दी है, जिसमें से 73 लाख निर्माणाधीन हैं और 43 लाख से अधिक को लाभार्थियों को सौंप दिया गया है।

एक घर तक पहुंच एक व्यक्ति के सामाजिक और आर्थिक कल्याण के साथ-साथ उसकी गरिमा का भी प्राथमिक संकेतक है। इस तथ्य को स्वीकार करते हुए, घर के स्वामित्व को सुनिश्चित करने के माध्यम से यह मिशन महिला सशक्तीकरण को गति प्रदान करता है।

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